काम की चाह-3


काम की चाह-3

लेखक : आनन्द

दूसरे दिन मेरा पूरा बदन दर्द हो रहा था मेरे पूरे बदन पर लाल लाल निशान थे जो आनन्द के काटने से बने थे। मैं रात की बात याद करके शर्म से लाल हो गई।

तभी मेरी माँ ने कहा- श्रद्धा, आज आनन्द चाय पीने के लिए नहीं आए, जा बुला ला !

मैं गई तो देखा कि आनन्द नंगे सो रहे थे, उनका काला लंड जो रात मैं खम्बे की तरह खड़ा था, वो भी सो रहा था।

मैंने उनके लंड पर हाथ फिराते हुए प्यार से आनन्द से कहा- स्वामीजी, उठिए माताजी बुला रही हैं।

आनन्द ने अपनी आँखें खोली और मुझ को देख कर मेरा हाथ पकड़ के अपने ऊपर खींच लिया और अपने साथ लिपटा लिया। मैंने आज लाल साड़ी पहनी हुई थी, ब्रा पेंटी मैं पहन नहीं सकती थी, आनन्द ने कल निप्पल को चूस के इतना लाल कर दिया था कि थोड़ा दर्द अब भी था, और चूत अब भी ऐसे लग रही थी जैसे आनन्द का लंड अभी भी चूत में हो !

आनन्द ने मेरे पतले होंठ अपने होंठों में दबा लिए और हल्के हल्के चूसने लगे, पैर से साड़ी को कमर तक ऊपर उठा कर खेलने लगे जाँघ से... दोनों हाथ मेरे बदन के नीचे सरका के धीरे धीरे चूचियों को सहला रहे थे। मैं थोड़ा दर्द महसूस कर रही थी लेकिन आनन्द के मालिश करने के अंदाज़ से वो दर्द भी मीठा लगने लगा था।

आनन्द ने मेरे होंठ छोड़े और कहा- मेरी जान, तुम बहुत प्यारी हो, मेरे दिल करता है इन नशीली आँखों में डूब जाऊँ।

उनका हाथ मेरे बदन से शरारत करता जा रहा था, मैंने अपनी कोहनी आनन्द की छाती पर लगा कर सिर ऊपर उठा लिया और जीभ फेर के आनन्द के चेहरे को चाटने लगी, वो मेरे उरोजों से खेल रहे थे, धीरे धीरे हो रहे स्तन के मर्दन से मेरी आँखों में नशा छा रहा था। फिर आनन्द ने मेरी गान्ड पे थपकी मारते हुए गान्ड को मसलना चालू किया, मेरी चूत की गर्मी से लंड भी तन रहा था।

आनन्द के हाथों का स्पर्श मेरे बदन को मदहोश कर रहा था, उन्होंने फिर मुझे कमर से जकड़ लिया मेरी पीठ, कूल्हों को मसलने लगे। और जीभ मेरी वक्ष घाटी में डाल दी, फिर ब्लाउज़ नीचे सरका कर बोबे आज़ाद कर के निप्पल पर जीभ गोल गोल फिराने लगे। उन्होंने तभी मेरी गान्ड के छेद को ढूँढ लिया और उंगली घुमाने लगे उसमें ! अचानक के इस हमले से मेरी गान्ड ऊपर को उठ गई और आनन्द ने उसका फ़ायदा उठाते पूरा स्तन मुँह में ले लिया, ऐसे चूस रहे थे जैसे खा जाएँगे।

अब उनका लंड खंभे जैसे हो गया था जो मेरी बिना पेंटी की चूत को महसूस हो रहा था, मैं भी अब चूत को लंड पर दबा रही थी, कमर गोल गोल घुमा कर लंड पर चूत को मसल रही थी, अब साड़ी भी मेरे बदन को अच्छी नहीं लग रही थी।

आनन्द ने जैसे मेरी बात को भाँप लिया और झटके से मेरी साड़ी निकाल कर मुझे नंगी कर दिया। मेरे नंगे बदन को देख आनन्द पागल हो उठे और उन्होंने मेरे बदन को नोचना शुरू किया, मैं भी उनका साथ दे रही थी।

आनन्द ने मेरे नीचे लेटे ही अपनी टाँगे खोल दी और मुझे जगह दी ताकि मैं चूत को लंड पर सही से ला सकूँ।

मैंने भी देर ना करते हुए चूत को लंड पर दबा दिया। आनन्द ने अपनी टांगें मेरी गान्ड पर कस ली और नीचे से लंड हिला हिला कर चूत पर लंड की मालिश करने लगे। फिर अचानक से एक उंगली मेरी गान्ड में घुसेड़ दी।

मैं चीख पड़ी और जैसे वो उंगली को गोल गोल घुमाने लगे, खुशी के मारे मैं चहकने लगी, बहुत मज़ा आ रहा था मुझे !

फिर आनन्द ने मेरी टाँगें चौड़ी कर ली और मुझे कहा- मेरे लंड पर बैठ जाओ !

उन्होंने अपने हाथ से लंड को ऊपर की ओर पकड़ के रखा और मैंने कूद कर चूत लंड पर टिका दी, खच से आधा लंड मेरी चूत को चीरता हुआ चूत में घुस गया। मैं जैसे ही रुकी, आनन्द ने मेरी कमर को पकड़ के कस के धक्का मार के पूरा लंड चूत में घुसेड़ दिया और झट से उंगली फिर से गान्ड में घुसा दी। मेरे दोनों छेदों में जैसे लंड हो, ऐसा लगने लगा।

आनन्द ने कहा- अब तुम मेरे लंड पर अपनी चूत को पटक कर मुझे चोदो !

मैंने मेरे दोनों हाथ आनन्द के कंधे पर रख दिए और गान्ड उठा कर चोदने लगी, जैसे मेरी गान्ड नीचे आती आनन्द की उंगली गान्ड में भी घुस जाती थी। मुझे दोहरी चुदाई का मज़ा मिल रहा था, मैं कस कस के आनन्द को चोद रही थी, मेरे उछलते बोबे वो दबा रहे थे और सिर उठा के चूम चाट रहे थे, आनन्द नीचे से लंड के धक्के मार रहे थे चूत में... मैं ऊपर से कूद के चूत पटक रही थी, पूरा लंड चूत में बच्चेदानी तक घुस जाता था और मेरे अंदर की आग को तेज करता था। मैं आनन्द के कंधे को दबा के कमर को गोल गोल घुमाते चूत से लंड को नोच रही थी, उहह आअहह की आवाज़ें निकल रही थी मेरे मुँह से ! मेरी गान्ड और चूत एक साथ चुद रही थी।

तभी आनन्द ने मुझे कमर से पकड़ लिया और बैठ गये अब मैं उनकी टाँगों पर सवार थी, उन्होंने मेरी कमर को पकड़ कर खुद अपने बदन से झटके मारने लगे बैठे बैठे, तेज धक्के मार के मुझे चोदने लगे, झुक कर मेरे चूचे चूसते थे, गले को चूमते थे, गान्ड सहला कर कस के चूत में लंड के धक्के मार रहे थे। मैं भी अपनी ओर से कस के सामने धक्के मार रही थी और चूत पटक रही थी लंड पर !

मेरे ऐसा करने से आनन्द और ज़ोर से पीछे की और धक्का मारते थे, हम दोनों लण्ड चूत को एक दूसरे के साथ पटक रहे थे इससे चुदने का मज़ा दुगना हो रहा था।

और फिर हम दोनो का पानी छूट गया, आनन्द ने कहा- मेरी रंडी जान, यह सुबह का नाश्ता कैसा लगा?

ऐसा बोलते हुए मेरे पतले होंठों को चूस रहे थे और हाथ फेर रहे थे मेरे नंगे बदन पर। मैंने कहा- जानू, बहुत अच्छा लगा, मेरी चूत भर गई !

फिर मैंने कहा- अब मुझे छोड़ो, सब इंतजार कर रहे होंगे !

तो आनन्द ने मुझे छोड़ दिया मैं जल्दी से उनके कमरे से निकल कर घर आ गई।थोड़ी देर बाद आनन्द फ्रेश होकर आ गये, रात भर जागने की वजह से उनकी आँखे लाल हो रही थी, मेरे पापा ने पूछा- आनन्द, तबीयत तो ठीक है?

आनन्द ने कहा- हाँ रात को बोर हो रहा था, इस लिए मूवी देखते हुए लेट सोया था।

मेरे पापा ने कहा- अगर रिश्ते में शादी ना होती तो मैं तुम्हें अपनी बगिया में ले चलता ! वहाँ एक कमरा है, खेत को पानी देने के लिए ट्यूब वेल भी है, वैसे अगर तुम जाना चाहो तो श्रद्धा के साथ चले जाओ।

मेरे पापा ने जैसे ही यह बात कही, आनन्द का चेहरा खुशी से खिल गया, आनन्द ने मेरे पापा से कहा- हाँ, यह ठीक रहेगा ! मैं भी आपकी बगिया देख लूँगा।

फिर पापा ने मुझ को बुला कर कहा- आनन्द को अपनी बगिया घुमा लाओ।

मैंने अदब से कहा- ठीक है पापा !

आनन्द ने मेरी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए कहा- मैं तैयार होकर आता हूँ !

हमारे बाग गाँव से 15 किलोमीटर दूर जंगल में हैं, वहाँ पर हमारा नौकर रहा करता था लेकिन शादी की वजह से वो भी यहीं घर पर रहता था, यानि बाग में कोई नहीं था।

आनन्द के मुस्कराने का मतलब मैं समझ गई थी, अब आगे क्या होने वाला है यह भी समझ चुकी थी ! वहाँ कोई ना होने का मतलब आनन्द मुझ को जंगल में चोदने वाले हैं।

आनन्द का लंड मेरा क्या हाल करेगा, यह सोच कर मेरा दिल कांप भी रहा था, और झूम भी रहा था।

थोड़ी देर बाद आनन्द ने मुझ को अपने घर से आवाज़ दी, मैं उनके पास गई तो वो बोले- सिर्फ़ साड़ी बाँध लो, अंदर कुछ भी मत पहनना ! आज जंगल में तेरी चूत का मंगल कर दूँगा !

मैंने कुछ कहना चाहा लेकिन यह सोच कर कि अब तो ये मेरे बदन के दूसरे मालिक हैं, इनसे क्या परदा, मैंने कहा- अगर तुम कहो तो नंगी ही चली चलूं?

तो आनन्द ने कहा- तुम्हारी यह ख्वाहिश रात को आते वक़्त पूरी कर दूँगा।

मैं शरमा कर अपने घर आ गई और आनन्द के कहने के मुताबिक अपने पूरे कपड़े उतार दिए एकदम नंगी हो गई और सिर्फ़ साड़ी बाँध कर तैयार हो गई।

थोड़ी देर बाद आनन्द के साथ मोटरसाइकल पर बैठ हम दोनों जंगल की तरफ रवाना हो गये।

मोटर साइकिल पर मैं आनन्द से चिपक कर बैठी थी। मेरे बदन पर साड़ी के अलावा कुछ ना होने की वजह से मेरे बोबे आनन्द की लोहे जैसी पीठ पर दब रहे थे और रास्ते के खड्डे के साथ उछलती मोटर साइकिल के साथ उनकी पीठ पर रगड़ खा रहे थे। बगिया में जाकर आनन्द के काले और बड़े लंड से चुदना है, इस लिए वैसे भी चूत गीली हो रही थी और मोटर साइकिल की इस मस्ती ने मेरी चूत को और गर्म कर दिया। मेरा मन कर रहा था कि वहाँ पहुँचते ही वो मुझे चोद दे।

आख़िर हम जब बगिया पहुँचे तो मेरे ऊपर चुदाई का नशा छाया हुआ था। कमरे में जाते ही मैंने आनन्द से चिपकते हुए कहा- आनन्द मुझे चोद दो, चूत बहुत प्यासी हो गई है।

आनन्द ने मेरे बदन को ढकती साड़ी खींच कर निकाल दी, उसके साड़ी निकालने के अंदाज़ से मैं डर गई और मुझे लगने लगा कि आज मेरा बदन चूत और गान्ड का बैण्ड बजने वाला है।

मुझे नंगी करके आनन्द ने मुझे हुक्म दिया- अब तुम नंगी ही रहोगी जब तक हम यहाँ हैं।

मैंने फिर से आनन्द से कहा- मुझे चोदो तो !

उन्होंने कहा- मुझे खुश कर अपने अंदाज़ से... तुम जितना मुझ को खुश करोगी मैं उतना तुम्हारी चूत को खुश करूँगा।

मैंने उनके काले लंड को निकाला और नीचे दोनों बॉल को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया।

आनन्द काफ़ी जोश में आ गये, वो मुझ को गंदी गंदी गाली दे रहे थे- रंडी, छिनाल, वेश्या, कुतिया ! और ना जाने क्या क्या कह रहे थे जिससे मेरा जोश और बढ़ रहा था, मेरा बस चलता तो मैं उनका लंड पकड़ कर अपनी चूत में घुसा लेती।

मैं उनके तने लंड के नीचे दोनों गेंदों को काफ़ी देर तक चूसते हुए उनकी टाँगों के नीचे से उनके पीछे की तरफ आ गई और उनको नीचे की तरफ झुका कर उनकी गाण्ड के छेद पर अपनी ज़ुबान लगा दी।

वो आआहह के साथ बोले- बहुत अच्छी रंडी है तू ! चाट, ज़ोर ज़ोर से चाट !

मैं पागलों की तरह उनको चाट रही थी और अपने दाँतों से आहिस्ता आहिस्ता काट रही थी, मुझको बड़ा मज़ा आ रहा था, मैं एक अंजान आदमी के साथ वो कर रही थी जिसको करने के लिए लोग शादी करते हैं, रंडिया ऐसा करने के लिए रूपए लेती हैं और मैं ये सब फ्री में कर रही थी।

आनन्द ने मेरे बालों को पकड़ कर खींचते हुए अपने आगे किया और काला नाग जैसा लंड मेरे मुँह में घुसेड़ दिया। एक बार फिर मेरी आँखें निकल आई उसी हालत मैं उन्होंने मुझ को ज़मीन पर लिटा दिया और 69 की पोज़िशन में आ गये, उनका लंड मेरे हलक से अंदर तक घुस रहा था, वो मेरे मुँह पर बैठ कर मेरे मुँह को चोद रहे थे औरआहिस्ता आहिस्ता चाटते हुए वो मेरी चूत की तरफ बढ़े और अपने दोनों हाथों से मेरी चूत की पंखुड़ियों को फ़ैला दिया जिससे मेरी चूत का छेद साफ नज़र आने लगा।आनन्द ने अपनी ज़ुबान की नोक मेरे छेद पर जैसे ही रखी, मेरा बदन एकदम से अकड़ गया, मेरी चूत ने एकदम से पानी छोड़ दिया। आनन्द ने पूरा पानी चाट गये, यह पहली बार आनन्द ने मेरी चूत पर मेहरबानी की। मैं पूरे जोश में उनके लंड को चूसने लगी, उनके लंड से भी वीर्य की गाढ़ी बाढ़ मेरे मुँह में गिरने लगी, इस बार मैं एक दासी की तरह उनका पानी पी गई।

वो मेरी चूत में अपनी उंगली अंदर बाहर करते हुए बोले- रंडी तुझ को चोदने में बड़ा मज़ा आएगा ! अगर पहले तेरी चूत देख लेता तो तेरी शादी में तेरे पति की जगह मैं तेरे साथ सुहागरात मनाता। मैंने उनका काला लंड जो थोड़ा थोड़ा सख्त था, मुँह से निकाल कर बोली- अगर इतनी अच्छी चूत है तो चोदते क्यो नहीं?

तो आनन्द ने कहा- मादरचोद, अगर जल्दी चोद दूँगा तो मेरे लंड की अहमियत तेरे को क्या मालूम होगी और तेरे जैसी गोरे और चिकना बदन वाली को तो अब हमेशा चोदता ही रहूंगा, जल्दी क्या है अभी तो शुरुआत है!

यह कह कर आनन्द ने अपनी दूसरी उंगली भी मेरी चूत में डाल दी। शादी शुदा होने के और आनन्द से अब दो बार चुद जाने के बावजूद मैं तड़प कर रह गई आनन्द से बोली- तकलीफ़ हो रही है..

आनन्द ने मुझे कुतिया की तरह झुकने को कहा। मैं आज पहली बार इतनी ज़िल्लत उठाने के बावजूद अपने आपको दुनिया की सबसे खुशनसीब औरत समझ रही थी, मैं एक गैर लंड से चुदने के लिए बेचैन थी, वो मेरे आका और मैं उनकी रखैल थी, वो मुझ को अपने इशारों पर नचा रहे थे और मैं नाच रही थी।

आनन्द ने अपने दोनों मजबूत हाथो से मेरे दोनों कूल्हों पर इतनी ज़ोर से मारा कि मैं चिल्ला उठी, मैं तड़प के बैठ गई और आनन्द के आगे हाथ जोड़ कर बोली- प्लीज़ तुम मुझ पर रहम करो, बहुत तकलीफ़ हो रही है।

तो आनन्द ने कहा- दर्द में ही मज़ा है मादरचोद रंडी !आनन्द ने मुझे नीचे लिटाया, मेरी टाँगों के बीच में बैठ गये तो मैंने अपनी टांगें उनकी कमर के दोनों तरफ कर दी, मेरी चूत ने मेहमान का स्वागत करने के लिए अपने मुँह का दरवाज़ा खोल दिया, आनन्द अपने लंड का आगे का हिस्सा मेरी चूत पर फिराने लगे मेरी ख्वाहिश पूरी होने जा रही थी, मेरी चूत एक काले मोटे लंड को अपने अंदर लेने को बेचैन होने लगी थी।

उनके लंड की लोहे की तरह गर्म टोपी मेरी चूत के छेद से टकराया और फिर आनन्द ने हल्के से एक झटका मारा और उनकी टोपी मेरी चूत को फाड़ती हुई अंदर घुस गई।

मेरा पूरा बदन काँपने लगा मेरे मुँह से चीख निकल गई ऐसा लगा किसी साण्ड ने अपना सींग मेरी चूत में घुसा दिया हो।

आनन्द ने मेरे उठे हुए बोबे को दबाते हुए कहा- क्यों रंडी, चुदवाने का बहुत शौक था? अब जब घुसा रहा हूँ तो चिल्ला क्यों रही हो।

मैं अपनी साँसों पर काबू पाते हुए बोली- चूत बनी है लंड के लिए लेकिन तुम्हारा तो मेरी कलाई के जितना मोटा है, लगता है लंड नहीं हाथ घुस गया हो !

तो आनन्द ने कहा- अभी तो सिर्फ़ टोपी ही अंदर गई है, अभी तो पूरा खंभा बाकी है।

मैं अपने आप को आगे की तकलीफ़ के लिए तैयार करने लगी, तभी आनन्द ने कहा- मैं अपना पूरा लंड तभी चूत में घुसेड़ूँगा जब तू मेरी शर्तें मानेगी।

मैं जल्दी से बोली- मुझ को तुम्हारी हर शर्त मंज़ूर है।

आनन्द ने कहा- ऐसे नहीं, मैं जो कहूँ उसको सुन और अपने मुँह से बोलना तब ही मैं मानूँगा।

मैं बोली- कहो, तुम्हारी क्या शर्तें हैं?

आनन्द बोले- तेरे पति के बाद तेरी चूत पर सिर्फ़ मेरा हक़ होगा और मैं जब चाहूँ और जहाँ चाहूँ, तुम अपनी चूत को मेरे लिए पेश करोगी।

मैंने कहा- मैं तुम्हारा लंड देख कर ही तुम्हारी हो गई हूँ, तुम मेरी चूत को मसल दो, मुझको बेदर्दी से चोदो, छिनाल रंडी बना दो, तुम दिन में बोलोगे तो दिन में, रात में बोलोगे तो रात में मैं हर जगह तुम्हारे लिए अपना जिस्म पेश कर दूँगी।

मैंने आनन्द से कहा- मुझको तुम्हारी हर शर्त मंज़ूर है।

आनन्द बोले- अब मज़ा आएगा तेरे जैसी औरत को रंडी बनाने में !

यह कह कर आनन्द ने अपना लंड थोड़ा बाहर निकाला और इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती, उन्होंने अपना काला मोटा लंड मेरी चूत में एक ज़बरदस्त झटके के साथ पेल दिया। मेरी चूत जो लंड लेने के लिए बेचैन थी, इस अचानक हमले को झेल नहीं पाई, ऐसा लगा कि मेरी पहली चुदाई हो रही है, मैं अब तक कुँवारी थी, मेरी चूत मैं उनका लंड घुसते ही पचाक की आवाज़ आई मेरी चूत का पानी उनके लंड के घुसते ही मेरी चूत से बाहर आने लगा, मेरे मुँह से चीख नकल गई, मैं तड़पने लगी लेकिन आनन्द पर इसका कोई असर नहीं हुआ।

मैं जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी, आनन्द पर इसका मानो कोई असर ही ना हुआ हो, वो जंगली सांड की तरह मेरे ऊपर चढ़े हुए थे, मेरा पूरा बदन पसीने से भीग गया था, आनन्द का पूरा लंड मेरी चूत में घुसा हुआ था, मेरे बदन का रोयाँ रोयाँ काँप रहा था। मेरे दिल में आया कि आनन्द से कह दूँ कि अपना लंड मेरी चूत से निकाल ले मुझ को नहीं चुदवाना है लेकिन इसी लंड के लिए तो मैंने अपना नाज़ुक बदन अपनी चूत और अपनी इज़्ज़त को दाँव पर लगाया था, इसी लंड को हासिल करने के लिए मैंने आनन्द की हर शर्त मंज़ूर की थी, फिर ऐसी खुशनसीब कम ही होती होंगी जिसको एक से ज़्यादा का लंड नसीब हुआ हो ! मैंने अपना सब कुछ आनन्द के लंड पर न्यौछावर कर दिया यह सोच कर कि अब मैं एक पति वाली औरत नहीं बल्कि एक रंडी रखैल बन गई हूँ, मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया, आनन्द ने अपना पूरा लंड बाहर निकाल लिया। मेरा रोम रोम खुशी से झूम रहा था।

आनन्द ने आहिस्ता आहिस्ता फ़िर अपने लंड को मेरी चूत में घुसाया और अंदर बाहर करने लगे, अब लण्ड आसानी से आ जा रहा था। थोड़ी देर में सुनामी की लहर की तरह पानी मेरी चूत में बरसने लगा, मेरी चूत उनके माल से पूरी तरह भर गईतो पानी बाहर की तरफ टपकने लगा, मैंने आनन्द को कस के लिपटा लिया और बेतहाशा उनको चूमने लगी, उनका पानी और मेरा पानी एक दूसरे में मिल गया। आनन्द ने अपना पूरा बोझ मेरे बदन पर डाल दिया उनकी छाती मेरे मुँह पर थी मैं उनको चूमे जा रही थी।

आनन्द ने कहा- आज से तेरा नाम रंडियों की लिस्ट में आ गया, अब तू छिनाल बन गई है, तेरा गोरा बदन तेरी गुलाबी चूत अब मेरी गुलाम है।

मैंने कहा- हाँ, मैं तुम्हारी रखैल बन कर बहुत खुश हूँ, अब तो तुम मेरे स्वामी हो और मैं तुम्हारी दासी हूँ, जैसा कहोगे वैसा करूँगी। वो मेरे बदन को सहलाते रहे, चूमते रहे, प्यार से मसलते रहे और ऐसे ही आनन्द के ऊपर लेटी हुई मैं सो गई और वो भी मुझे अपनी बाहों में लेकर सो गये।
हजारों कहानियाँ हैं अन्तर्वासना डॉट कॉम पर !

बचपन की सहेली


बचपन की सहेली

प्रेषक : लव कुमार

नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम लव कुमार है, मेरी उम्र 24 साल, ज्यादा हट्टा-कट्टा तो नहीं पर एक खूबसूरत बदन का मालिक हूँ मैं। लड़कियाँ मुझे चोकोलेटी बॉय कहती है। मेरा रंग साफ़ है और ऊपर वाले की दया से दो-तीन गर्लफ्रेंड भी हैं।

मैं काफी समय से अन्तर्वासना की सेक्सी कहानियाँ पढ़ रहा हूँ और मुझे ये सब बहुत पसंद है। अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़ कर ही मैंने पहली बार मुठ मारी थी।

आज मेरा भी दिल किया तो अपनी एक कहानी आपको भेज रहा हूँ। यह मेरी लिए बेहद अच्छा अनुभव था।

मैं पढ़ता था, तब मैं थोड़ा शरारती किस्म का लड़का था और अक्सर अपनी क्लास की लड़कियों को छेड़ता रहता और लड़कियों की गांड खुजाना मेरा सबसे पसंदीदा शौक था।

स्कूल के बाद शाम को मैं अपने एरिया के लड़के और लड़कियों के साथ छुपन छुपाई खेला करता था। वो भी इनमें से ही एक थी जिसने मेरे लंड को अंगडाई लेना सिखाया था।

सीमा नाम था उसका। बचपन से ही वो मेरी दोस्त थी। मैंने उसके बदन को बहुत चूसा और रगड़ा था। मेरे दबाने से ही उसके टिकोरे चुचियों में बदल गए थे। लेकिन ये सब ज्यादा दिन नहीं चल सका। मेरे पापा का तबादला दूसरे शहर में हो गया और हम सब वहाँ चले गए।

वहाँ जाकर मैं सीमा को बहुत मिस करता था और अक्सर उसकी याद में लंड निकाल कर मुठ मारा करता था। वैसे तो नए शहर में आते ही एक लड़की फंसा ली थी पर उससे मुलाक़ात नहीं हो पाती थी।

ऐसे ही 5 साल बीत गए। मैं सब भूल गया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद जॉब की तलाश कर रहा था। तभी मुझे एक दिन मेरे बचपन का दोस्त संजय मिला। उसने मुझे बताया कि उसने शादी कर ली है।

मैं उस पर बहुत नाराज हुआ और उसको भाभी से मिलवाने के लिए कहा। वो बहुत शर्मिंदा हुआ और उसने मुझे अपने घर पर चलने को कहा तो मैं उसके साथ उसके घर चल दिया।

घर पहुँचते ही उसने अपनी बीवी को आवाज दी तो एक खूबसूरत सी लाल रंग की साड़ी में लिपटी हुई अप्सरा कमरे में आई। जैसे ही मैंने उसको देखा तो चौंक गया।

वो सीमा थी !

मैं कुछ बोल नहीं पाया। बस सीमा को देखता रहा। पांच साल में क्या मस्त माल बन गई थी यार यह। वे चूचियाँ जो कभी मैं मसला करता था अब बड़े बड़े चुचे बन गए थे। लिपस्टिक से पुते हुए होंठ गुलाब की पंखुड़ी जैसे लग रहे थे। लाल रंग की साड़ी में से गोरा गोरा पेट इतना मस्त लग रहा था कि क्या कहूँ।

संजय ने सीमा से मेरा परिचय करवाया। वो नहीं जानता था कि हम दोनों एक दूसरे को पहले से जानते है। मैंने सीमा की आँखों में देखा तो महसूस किया कि वो मुझे देख कर खुश थी। मैंने उसको शादी की बधाई दी और होंठों को किस करने की मुद्रा में करके उसकी तरफ इशारा किया तो वो शरमा गई। मुझे देख कर उसकी आँखों में चमक आ गई थी।

संजय ने सीमा को चाय बना कर लाने के लिए कहा तो सीमा मुस्कुराती हुई अंदर चली गई। सीमा जब अंदर जा रही थी तो उसकी मटकते मोटे कूल्हे देख कर मेरा तो लण्ड अकड़ने लगा था और दिल कर रहा था कि सीमा को अभी पकड़ कर चोद दूँ।

संजय मेरी नजर को ताड़ गया और बोला- साले क्या देख रहा है?

मैं थोड़ा सा झड़प गया पर फिर मैंने सीमा की तारीफ करते हुए कहा- बहुत मस्त माल मिला है तुम्हें !

तो संजय भी खुश हो गया और बोला- यार, बहुत अच्छी लड़की है और घर का सारा काम कर लेती है। मेरी माँ को भी पसंद थी तो मैंने शादी कर ली।

मैं मन ही मन मुस्कुरा उठा कि सीमा और अच्छी लड़की !

तभी सीमा चाय बना कर ले आई, तीनों ने चाय पी और थोड़ी इधर उधर की बातें करते रहे। चाय खत्म हुई तो सीमा चाय के कप उठा कर रसोई में चली गई और तभी संजय का फोन आ गया।

मैं उठा और रसोई की तरफ बढ़ गया।

"सीमा... कैसी हो?" मेरी आवाज सुन कर सीमा थोड़ा घबरा गई।

"लव... तुम यहाँ कैसे?"

"संजय मेरा बहुत पुराना दोस्त है।"

"लव... प्लीज संजय को हमारे बारे में पता नहीं लगना चाहिए... वो बचपन की नादानी थी और अब वो बातें पुरानी हो गई हैं।" वो घबरा रही थी।

मैंने उसको भरोसा दिलाया कि संजय को कभी कुछ पता नहीं लगेगा। मैं मन ही मन खुश था कि सीमा को सब कुछ याद था।

तभी संजय वापिस अंदर आया तो मैंने संजय से जाने को बोल कर अपने घर की तरफ निकल लिया पर मैं जानबूझ कर अपना सामान संजय के घर भूल आया था ताकि मुझे संजय के घर दुबारा जाने का मौका मिल सके।

अगले दिन संजय का फोन आया और बोला- तेरा कुछ सामान मेरे घर पर रह गया है।

तो मैंने कहा- मैं आज दिन में आकर ले जाऊँगा, तुम बस घर पर फोन कर देना।

संजय ने कहा- तेरा अपना घर है, जब तेरी मर्जी हो तो जा कर ले लेना। मैं नहीं भी होऊँगा तो क्या तेरी भाभी तो होगी ही घर पर, उस से ले लेना।

मैं तो खुशी के मारे नाच उठा था यह सोच कर कि सीमा से अकेले में मिलने का मौका मिलेगा।

मैं नहा धोकर करीब 11 बजे घर से निकल कर सीधा संजय के घर पहुँच गया।

घण्टी बजाई तो सीमा ने ही दरवाजा खोला। तभी अंदर से सीमा की सास मतलब संजय की माँ की आवाज आई– बहू... कौन है?

संजय की माँ को देख कर मेरा मूड खराब हो गया। मैं अंदर गया और संजय की माँ को प्रणाम किया। मैंने सीमा से अपना सामान माँगा तो संजय की माँ ने मुझे चाय पी कर जाने को कहा।

मैंने थोड़ी ना-नुकर की पर फिर रुक गया। सीमा चाय लेने चली गई और मैं संजय की मम्मी के साथ बात करने लगा।

सीमा थोड़ी देर में चाय लेकर आ गई और हम चाय पीने लगे।

तभी आंटी ने कहा- मेरा सीरियल आने वाला है, तुम लोग बैठ कर बाते करो, मैं अंदर जाकर थोड़ा टीवी देखती हूँ।

अब कमरे में सिर्फ सीमा और मैं ही थे। सीमा सच में बहुत कमाल लग रही थी।

"सीमा तुम्हें सब याद है वो सब?" मैंने सीमा को कुरेदते हुए कहा।

"प्लीज लव... यहाँ ये सब बातें मत करो... कही सासू जी ने सुन लिया तो गड़बड़ हो जायेगी।"

मैंने उसको हाँ या ना में जवाब देने को कहा तो उसने हाँ में सिर हिला दिया। मैं उठ कर सीमा के पास जाकर बैठ गया और उसका हाथ पकड़ लिया तो वो मना करने लगी। मैंने दूसरा हाथ उसकी चूचियों पर रख दिया और बोला– सीमा... तुम्हारा तो मस्त साइज हो गया है..."

सीमा ने मेरा हाथ वहाँ से हटा दिया।

"तुम भी कमाल हो यार... जिसने चूस चूस कर और मसल मसल कर इन्हें इतना मस्त बनाया तुम उसे ही हाथ नहीं लगाने दे रही हो...?"

"लव... मैं अब किसी की पत्नी हूँ... और यह सब अब ठीक नहीं है।"

"मतलब जिस पेड़ को इतना बड़ा किया उसी के फल माली को खाने को नहीं मिलेंगे..."

उसने बहुत मना किया पर फिर भी मैंने उसको एक किस के लिए मना लिया। अब मैंने उसके लिपस्टिक से रंगे गुलाबी होंठों को अपने होंठों में दबा लिया। मैं सीमा के रसीले होंठ चूस रहा था और सीमा की आँखें भी मस्ती के मारे बंद हो गई थी। सीमा भी अब मेरा साथ देने लगी थी।

अचानक सीमा ने मुझे धक्का मार कर अपने से अलग किया और मुझे जाने के लिए कहा। मैंने मना किया तो वो नाराज होने लगी। मैंने सोचा कि कहीं अपनी सास को ना बुला ले तो मैं अपना सामान उठा कर वहाँ से चला आया।

पूरा दिन सीमा को याद करते हुए बीता। शाम को सीमा का फोन आया। सीमा की आवाज सुन कर मेरा दिल धड़क उठा और जब सीमा ने मुझे कहा कि वो मुझे कहीं बाहर मिलना चाहती है तो दिल बाहर निकल जाने को हो गया।

सीमा ने बुधवार के दिन कहीं बाहर मिलने का प्लान बनाया क्योंकि संजय को उस दिन टूअर पर जाना था।

मैंने पूछा तो वो बोली- किसी होटल या किसी के घर पर मिलने का प्रोग्राम बनाओ।

मैं समझ गया था कि यह उस किस का ही परिणाम है। मैंने हाँ करने में बिल्कुल भी देर नहीं की और फोन काटने के तुरंत बाद एक होटल में रूम बुक करवा दिया।

अगले दो रातें मैं ठीक से सो नहीं पाया और ख्वाबों में सीमा को कई बार चोद दिया।

बुधवार दोपहर के 12 बजे मिलने का प्रोग्राम तय हुआ था। वो तय समय पर मुझे अपने घर से बाहर सड़क पर मिली। हम दोनों एक टैक्सी में बैठे और होटल में पहुँच गए।रूम की चाबी लेकर हम दोनों रूम में चले गए।

जैसे ही हम रूम में घुसे तो मैंने सीमा से पूछा- क्या इरादा है?

तो वो मेरे गले से लग गई और बोली- लव, मुझे प्यार करो।

मुझे तो पहले से पता था कि वो किस प्यार की बात कर रही है पर फिर भी मैंने पूछा- किस प्यार की बात कर रही हो?

तो वो बोली- संजय अपने काम में इतना व्यस्त रहता है कि मुझे बिल्कुल भी समय नहीं दे पाता है और फिर जब रात को थक हार कर घर आता है तो मुझे बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं कर पाता।

"लव सब कुछ करने से पहले मेरी एक शर्त है कि संजय को या और किसी को अपने संबंधों के बारे में पता नहीं चलना चाहिए और ना ही यह पता लगे कि हम दोनों पहले से एक दूसरे को जानते हैं।"

मुझे तो बस चूत नजर आ रही थी तो मैंने एक दम से हाँ कर दी और सीमा को पकड़ कर उसके होंठ चूसने लगा। वो भी बिना देर किये मेरा साथ देने लगी।

कुछ देर होंठ चूसने के बाद सीमा ने मेरे बाल पकड़ कर मेरा सिर अपनी चूचियों पर दबाना शुरू कर दिया तो मैं समझ गया कि वो अब क्या चाहती है। मैंने उसका कमीज उतार दिया और उसकी ब्रा में कसी मोटी मोटी चूचियों दबाने लगा।

सीमा आह्ह्ह... उफ्फ्फ.. करने लगी। मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी और उसको बेड पर लेटा कर उसकी चूचियों को मुँह में लेकर चूसने लगा। सीमा की सिसकारियाँ गूंजने लगी थी। मैं कभी उसकी दायीं चूची को चूसता तो कभी बायीं चूची को।

सीमा मस्ती के मारे सिसिया रही थी- "चूस लव चूस जोर से चूस मेरी चुचियाँ....आह्ह्ह....ओह्ह्ह्ह...बहुत मज़ा आ रहा है....आह्हह्ह"

फिर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला और उसकी पेंटी सहित नीचे सरका दिया। पेंटी नीचे होते ही सीमा की गुलाबी चूत नजर आने लगी। मैं तो अपने दिल की रानी की गुलाबी चूत देख कर पागल हो गया। चूत बहुत चिकनी लग रही थी। मैं समझ गया था कि सीमा ने सुबह ही चूत के बाल साफ़ किये हैं।

मैं सीधा उसकी टांगों के बीच में आ गया और उसकी गुलाबी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा। उसकी चूत की महक और स्वाद बहुत मस्त था। सीमा आह्ह ह्ह्ह ओह्ह्ह कर रही थी। मैं उसकी आवाजों का मज़ा लेते हुए उसकी चूत चाट रहा था। मैं जीभ को अंदर बाहर कर रहा था जिसमें उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था।

"लव डाल दो अपनी पूरी जीभ मेरी चूत में... करते रहो लव..." सीमा मस्त हुई जा रही थी।

मैं कुछ देर ऐसे ही करता रहा कि तभी वो अकड़ी और फिर जोर से झड़ गई। उसकी चूत से पानी निकल कर मेरे मुँह पर आ गिरा। मुझे पहले तो थोड़ा गन्दा लगा पर फिर उसकी मोहक खुश्बू ने मेरा मन मोह लिया और मैं उसका सारा पानी चाट गया।

अब उसकी बारी थी। मैंने उसको उठाया और अपना लण्ड निकाल कर उसके आगे कर दिया। उसने बिना देर किये मेरा लण्ड चूसना शुरू कर दिया। वो ऐसे चूस रही थी जैसे कोई आइसक्रीम चूस रही हो। मुझे बहुत आनन्द आ रहा था। आज पहली बार कोई मेरा लण्ड चूस रही थी। मेरा बदन मस्ती में झूलने लगा था। मैं ज्यादा देर रोक नहीं पाया और एक आह के साथ मैंने मेरे लण्ड का माल सीमा के मुँह में छोड़ दिया।

सीमा का मुँह मेरे माल से भर गया था पर सीमा ने सारा माल बाहर थूक दिया। मुझे बहुत बुरा लगा क्योंकि मैंने उसका सारा पानी पी लिया था पर उसने मेरा नहीं पिया।

अब बारी कुछ आगे करने की थी। मैंने सीमा की चूत पर पहले तो थोड़ी जीभ फेरी और फिर एक उंगली डाल कर अंदर बाहर करने लगा। वो मस्त होकर आहें भरने लगी थी। मेरा लण्ड उसकी सेक्सी आह्हें सुन कर फिर से खड़ा हो गया था।

"लव... अब और मत तड़पाओ... चोद दो मुझे... बुझा दो प्यास मेरी चूत की !" सीमा मस्ती के मारे गांड उछाल रही थी।

मैं भी अब रुकना नहीं चाहता था, मैं भी उसकी टांगों के बीच में आया और अपना लण्ड उसकी चूत के मुँह पर रख दिया और उसकी चूत के दाने पर रगड़ने लगा। मेरे गर्म सुपारे की रगड़ उसकी चूत में आग भर रही थी। अब सीमा बार बार प्रार्थना कर रही थी कि लव जल्दी से लण्ड चूत में डाल दो... मत तड़पाओ।

उसके छेद पर लण्ड रख कर मैंने एक धक्का लगाकर लण्ड को चूत में सरकाया तो उसके मुँह से आह्ह्ह की आवाज निकल गई। मैंने थोड़ा ज्यादा जोर लगा कर एक और धक्का लगाया तो आधा लण्ड उसकी चूत में चला गया। सीमा के मुँह से चीख निकल गई। सीमा की चूत बहुत कसी थी और मुझे संजय के व्यस्त होने का एहसास करवा रही थी। मुझे संजय पर तरस आया कि वो अब तक अपनी बीवी की चूत को अच्छे से खोल भी नहीं पाया था और अब यह काम मुझे करना था।

मैंने दो तीन जोरदार धक्के लगा कर पूरा लण्ड चूत में डाल दिया। वो चीखती रही पर मैं नहीं रुका। सीमा की आँखों से आँसू बहने लगे थे। मस्त टाईट चूत में घुसने के कारण मेरा लण्ड चिरमिराने लगा था। हम दोनों ही दर्द में थे पर फिर भी मैं काफी देर तक उसके होंठ चूसता रहा।

थोड़ी देर बाद जब दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने लण्ड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। थोड़ी ही देर में सीमा भी मेरा साथ देने लगी। 3-4 मिनट ऐसे ही चोदने के बाद मैंने उसको बेड के किनारे पर लेटाया। मैं खुद नीचे खड़ा हो गया और उसकी टांगों को अपने कंधों पर रख कर उसकी चूत में अपना लण्ड डाल दिया। मैं जोर जोर से धक्के लगाने लगा। ऐसे चुदने में उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था। वो गांड उठा उठा कर चुदवा रही थी।

"चोद मुझे... मार ले मेरी... चोद... आज तूने असली में मुझे जवान कर दिया लव... चोद अपनी बचपन की सहेली को.... ले ले मज़ा आह्हह ओह्ह... चोद..." सीमा मस्ती में बड़बड़ा रही थी।

अब उसकी चूत गीली हो रही थी, मैं तेज तेज धक्कों के साथ उसको चोद रहा था। तभी वो अकड़ गई और उसने मेरी बाजू मजबूती से पकड़ ली। उसके नाखून मेरे बाजू में धंस गए और फिर वो एकदम से झड़ गई।

मैंने उसे घोड़ी बना लिया और फिर पीछे से लण्ड उसकी चूत में डाल दिया। कुल 10-12 मिनट की चुदाई के बाद मैंने अपना माल उसकी चूत में छोड़ दिया। मेरे गर्म माल की गर्मी से वो एक बार फिर से झड़ गई।

हम दोनों थोड़ी देर नंगे ही पड़े रहे। दस मिनट के बाद मैंने उसे उठाया और हम दोनों बाथरूम में गए, मैंने उसकी चूत साफ़ की।

मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया था, मैंने उसको एक बार फिर से बाथरूम में चोद दिया। वो बाथरूम में पानी के नीचे चुदते हुए 3 बार झड़ गई और फिर हम दोनों नहा कर वापिस आ गए।

उसके बाद से मैं उसको 8-9 बार चोद चुका हूँ। अपने बचपन की सहेली की चुदाई मेरे लिए यादगार बन गई थी।

बाद में उसने अपनी सहेलियों की चूत भी दिलवाई पर सीमा जैसा मज़ा किसी में नहीं था।

आप सबको कहानी कैसी लगी मुझे मेल करके जरूर बताना।
हजारों कहानियाँ हैं अन्तर्वासना डॉट कॉम पर !
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...